Ved (वेद) by Rajul Bhargava Edition September 2026 (Hindi)
Ved (वेद) by Rajul Bhargava Edition September 2026 (Hindi)
Description
Ved (वेद) सरल आधुनिक हिंदी में चारों वेदों की एक-खंडीय, 280-पृष्ठ प्रस्तुति है। आवरण पाठक वर्ग स्वयं बताता है—सभी आयु वर्ग के पाठकों हेतु—और भीतर की सामग्री विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर बनी है: विद्यार्थियों के लिए महत्त्व एक नामित खंड है, मंत्रों के अर्थ इसी पर समाप्त होते हैं कि वह मंत्र विद्यार्थी से क्या कहता है, और अंत के तीन खंड सीधे विद्यार्थियों को संबोधित हैं।
पुस्तक अपनी योजना चार पंक्तियों में स्वयं कहती है: ऋग्वेद सिखाता है—कैसे सोचें; यजुर्वेद—कैसे काम करें; सामवेद—कैसे मन को संतुलित एवं शान्त रखें; अथर्ववेद—कैसे जीवन की समस्याओं को हल करें। चारों भाग इसी क्रम में हैं और हर एक का परिचय इसी रूप में दिया गया है।
इसका विस्तार चयनित नहीं, पूर्ण है। 91 अध्याय और काण्ड: ऋग्वेद 10 में, शुक्ल यजुर्वेद 18 में, कृष्ण यजुर्वेद अपनी चारों संहिताओं—तैत्तिरीय, मैत्रायणी, कठ और कपिष्ठल-कठ—में 29 अध्यायों में, सामवेद 14 में, और अथर्ववेद काण्ड दर काण्ड, पूरे 20।
132 चयनित मंत्र संस्कृत में छपे हैं और हर एक के साथ-साथ उसका सरल अर्थ, और हर अर्थ व्यावहारिक बिंदु पर समाप्त होता है—विद्यार्थी के लिए इसका संदेश है कि… खंड दर खंड गिना गया: ऋग्वेद में 36, शुक्ल यजुर्वेद में 37, सामवेद में 39 और अथर्ववेद में 20।
यह पुस्तक उस पाठक के लिए है जिसने चारों वेदों का नाम सुना है, पर कभी उन्हें पढ़ा नहीं:
- Students & Young Readers—वह पाठक वर्ग जिसे पुस्तक हर भाग में नाम लेकर संबोधित करती है।
- Readers of Every Age—सभी आयु वर्ग के पाठकों हेतु, आवरण का अपना शब्द; संस्कृत का पूर्वज्ञान आवश्यक नहीं।
- Teachers & Value-education Programmes—छोटे अध्याय, हर एक एक स्पष्ट संदेश के साथ
- Working Readers & Team Leads—व्यापार और नेतृत्व के लिए सीख 29 अध्यायों में उपलब्ध है, और अंत में उसका अपना दस-बिंदु खंड है।
- Families Reading Together—एक बैठक में एक मंत्र, उसका सरल अर्थ और एक व्यावहारिक पंक्ति।
- Anyone Wanting All Four Vedas in One Place—चयन नहीं; ऋग्वेद, दोनों यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का हर काण्ड।
- Readers of the Sanatana Bodh Series—जिनके पास पहले से Mera Sanatan, Upanishad या Bhagavad Gita हैं।
The Present Publication is the 1st Edition | 2026. परिकल्पनाकार राजुल भार्गव, Sanatana Bodh imprint के अंतर्गत प्रकाशित, निम्नलिखित उल्लेखनीय विशेषताओं के साथ:
- [All Four Vedas, Complete in One Volume] 91 अध्याय और काण्ड—ऋग्वेद 10, शुक्ल यजुर्वेद 18, कृष्ण यजुर्वेद 29 चार संहिताओं में, सामवेद 14, अथर्ववेद के पूरे 20 काण्ड। यजुर्वेद की दोनों शाखाएँ ली गई हैं—शुक्ल 18 अध्यायों में, और कृष्ण अपनी चारों उपलब्ध संहिताओं में।
- [132 Mantras, Each with Its सरल अर्थ] संस्कृत के साथ-साथ सरल हिंदी अर्थ छपा है, और हर अर्थ इस पर समाप्त होता है कि वह मंत्र पाठक से क्या कहता है।
- [The Same Six Sections on All 29 Krishna Yajurveda Chapters] परिचय मुख्य विषय · विद्यार्थियों के लिए महत्त्व व्यापार और नेतृत्व के लिए सीख रोचक तथ्य मुख्य संदेश। 29-29, कोई अपवाद नहीं—केवल इसी भाग में 174 नामित खंड
- [Four Full-Colour Illustrated Openers] हर वेद एक चित्रित पट्ट से खुलता है—अग्नि के सामने बैठे ऋषि, और खुली हुई पाण्डुलिपि। अन्यथा श्वेत-श्याम पुस्तक में चार रंगीन पृष्ठ
- [The Rigveda Set Out in Full] ऋचा से सूक्त, सूक्त से मण्डल और मण्डल से संहिता तक इसकी संरचना; दस मण्डलों का पंक्तिवार सार; बारह प्रमुख देवता और हर एक विद्यार्थी से क्या कहता है; चार नामित ऋषिकाएँ—लोपामुद्रा, अपाला, घोषा और वाक् अम्भृणी; प्रमुख सूक्तों की दो तालिकाएँ, जिनमें नासदीय, पुरुष, हिरण्यगर्भ, वाक् और संज्ञान हैं; और ऋग्वेद की 10 प्रमुख शिक्षाएँ।
- [Both Yajurvedas, and the Difference Between Them] शुक्ल यजुर्वेद वाजसनेयी संहिता तथा उसकी माध्यंदिन और काण्व शाखाओं के माध्यम से; कृष्ण यजुर्वेद अपनी चारों उपलब्ध संहिताओं के माध्यम से; और एक तुलना तालिका जो दोनों को शैली, शाखाओं और अध्ययन-पद्धति पर आमने-सामने रखती है।
- [The Samaveda as Music] साम अर्थात् स्वरबद्ध वैदिक गान; पूर्वार्चिक और उत्तरार्चिक, अंतर की तालिका सहित; उद्गाता और उसकी भूमिका; कौथुम, राणायनीय और जैमिनीय शाखाएँ; और गीता की अपनी पंक्ति—वेदों में मैं सामवेद हूँ।
- [The Atharvaveda, Kanda by Kanda] हर काण्ड की 20-पंक्ति तालिका, विषय और महत्त्व सहित, फिर सभी 20 क्रम से—स्वास्थ्य, सुरक्षा, परिवार, समृद्धि, पृथ्वी और पर्यावरण, विवाह, तथा जीवन और मृत्यु पर चिंतन—और अंत में नौ शाखाएँ, शौनक और पैप्पलाद से लेकर अब लुप्त हो चुकी छह तक।
- [A Student Apparatus, Stated as Such] ऋग्वेद भाग 25 जीवन सिद्धांत, 25 दैनिक जीवन सूत्र और 20 चिंतन प्रश्न पर समाप्त होता है; पुस्तक दस-बिंदु के विद्यार्थियों के लिए वेदों का मार्गदर्शन पर। चारों क्रमांकित सूचियाँ हैं, जिन पर पाठक क्रम से काम कर सकता है।
- [Ten जीवन सूत्र, Each Worked Out Four Ways] दसों में से हर एक के साथ एक अर्थ, एक जीवन में महत्त्व, एक विद्यार्थियों के लिए और एक मुख्य संदेश—छह पृष्ठों में 40 खंड।
- [Vedas at Work] वेदों से नेतृत्व और व्यवसाय से जुड़ी सीख तथा वेदों का दैनिक जीवन में उपयोग, दस-दस बिंदु; साथ में हर वेद का अपना परिशिष्ट पृष्ठ, जिसमें उसकी मुख्य पहचान, मुख्य विषय और विद्यार्थियों के लिए महत्त्व है, और चारों की चार-पंक्ति तुलना तालिका।
- [Simple Hindi, No Prerequisite] आद्योपांत सरल आधुनिक हिंदी। संस्कृत हमेशा अपने अर्थ के साथ दी गई है; कुछ भी पूर्वज्ञान मान कर नहीं चला गया।
- [Responsible about Its Limits] पुस्तक में छपी अस्वीकृति कहती है कि विषय सामग्री को स्पष्टता के लिए सरल या भावानुवादित किया गया है, कि यह पुस्तक मूल ग्रंथों का स्थान नहीं लेती, और प्रामाणिक अध्ययन चाहने वाले पाठकों को मूल स्रोतों पर लौटना चाहिए।
- [Part of the Sanatana Bodh Series] एक चुनी हुई हिंदी सूची का वैदिक खंड, Mera Sanatan तथा उपनिषद, गीता, महाभारत, रामचरितमानस, मनुस्मृति और अर्थशास्त्र पर की गई पुस्तकों के साथ।
पुस्तक की विषय-वस्तु इस प्रकार है:
- ऋग्वेद — 10 अध्याय
- पहले छह पृष्ठ का परिचय: ऋग्वेद क्यों महत्त्वपूर्ण है, ऋचा से सूक्त, सूक्त से मण्डल और मण्डल से संहिता तक इसकी संरचना, दस मण्डलों का पंक्तिवार सार, बारह प्रमुख देवता और हर एक विद्यार्थी से क्या कहता है, चार नामित ऋषिकाएँ, प्रमुख सूक्तों की दो तालिकाएँ, और चौदह-पंक्ति की ऋग्वेद की विशेषताएँ—एक नज़र में, जो 10 मण्डल, 1,028 सूक्त और लगभग 10,600 ऋचाएँ बताती है। फिर दस अध्याय—ज्ञान और प्रार्थना, परिश्रम और कर्तव्य, विवेक, साहस, प्रकृति और पर्यावरण, अनुशासन, नेतृत्व, सहयोग, शुद्धता, और समाज एवं जीवन के नियम—जिनमें 36 मंत्र अपने सरल अर्थ के साथ हैं। भाग 25 जीवन सिद्धांत, 25 दैनिक जीवन सूत्र और 20 चिंतन प्रश्न पर समाप्त होता है।
- शुक्ल यजुर्वेद — 18 अध्याय
- वाजसनेयी संहिता, उसकी माध्यंदिन और काण्व शाखाओं सहित; फिर अठारह अध्याय—यज्ञ की तैयारी से लेकर अनुशासन, कर्तव्य, परिश्रम, सहयोग, धैर्य, सत्य, नेतृत्व, ज्ञान, प्रकृति, स्वास्थ्य, सेवा, साहस, समय, संतोष, चरित्र, परिवार और समाज होते हुए शांति के समापन अध्याय तक। सभी 18 में परिचय, सार और मुख्य संदेश हैं; कुल 37 मंत्र, और अंत में यजुर्वेद—समग्र सार।
- कृष्ण यजुर्वेद — 4 संहिताओं में 29 अध्याय
- पहले दोनों शाखाओं की तुलना, फिर चारों उपलब्ध संहिताएँ क्रम से: तैत्तिरीय (9 अध्याय), मैत्रायणी (7), कठ (8) और कपिष्ठल-कठ (5)। 29 में से हर एक वही छह नामित खंड रखता है—परिचय, मुख्य विषय, विद्यार्थियों के लिए महत्त्व, व्यापार और नेतृत्व के लिए सीख, रोचक तथ्य और मुख्य संदेश—अध्याय दर अध्याय गिना गया, 29-29।
- सामवेद — 14 अध्याय
- साम अर्थात् स्वरबद्ध वैदिक गान; पूर्वार्चिक और उत्तरार्चिक का विभाजन, अंतर की तालिका सहित; उद्गाता; कौथुम, राणायनीय और जैमिनीय शाखाएँ; और सामवेद पर गीता की पंक्ति। फिर चौदह अध्याय—अग्नि, इन्द्र और सोम; ज्ञान और प्रकाश; एकाग्रता और अध्ययन; प्रार्थना और मानसिक शांति; सकारात्मक वाणी; सहयोग; प्रकृति; धैर्य और आत्मबल; गुरु और शिक्षा; संतुलित जीवन; सामगान और स्वर की साधना; तथा सामवेद और आधुनिक जीवन—जिनमें 39 मंत्र हैं।
- अथर्ववेद — 20 काण्ड
- अथर्ववेद क्या है, उसे कैसे पढ़ें, उसकी संरचना, और हर काण्ड की 20-पंक्ति तालिका उसके विषय और महत्त्व के साथ। फिर सभी बीस क्रम से: स्वास्थ्य और जीवन-संतुलन, रोग निवारण और मानसिक शक्ति, सुरक्षा, परिवार, समृद्धि, संरक्षण, शांति, साहस, दीर्घायु, ज्ञान, सामाजिक व्यवस्था, पृथ्वी और पर्यावरण, आत्मज्ञान, विवाह और परिवार, संयम, संकट से रक्षा, प्रार्थना और आशीर्वाद, जीवन और मृत्यु, विविध विषय, तथा स्तुति। हर एक में परिचय, मुख्य विषय, एक चयनित मंत्र अपने अर्थ के साथ, मुख्य संदेश और सार—अंत में नौ शाखाएँ।
- अंत खंड — चारों वेद का परिशिष्ट और विद्यार्थी खंड
- हर वेद के लिए एक परिशिष्ट पृष्ठ, जिसमें उसकी मुख्य पहचान, मुख्य विषय और विद्यार्थियों के लिए महत्त्व है; फिर चार-पंक्ति की चारों वेद—त्वरित तुलना और संयुक्त संदेश। इसके बाद वेदों से 10 जीवन सूत्र, दसों में से हर एक अर्थ, जीवन में महत्त्व, विद्यार्थियों के लिए और मुख्य संदेश के साथ; फिर विद्यार्थियों के लिए वेदों का मार्गदर्शन, नेतृत्व और व्यवसाय से जुड़ी सीख तथा वेदों का दैनिक जीवन में उपयोग—दस-दस बिंदु के तीन खंड; वेदों का संक्षिप्त इतिहास और संरचना; और समापन में वेद—प्राचीन ज्ञान, आधुनिक जीवन का मार्गदर्शन
पुस्तक की संरचना इस प्रकार है:
- Four Vedas in Order—ऋग्वेद कैसे सोचें, यजुर्वेद कैसे काम करें, सामवेद कैसे शांत रहें, अथर्ववेद कैसे समाधान निकालें; पुस्तक की अपनी योजना।
- An Introduction Before Every Veda—संरचना, शाखाएँ, देवता, प्रमुख सूक्त और एक विशेषताएँ—एक नज़र में तालिका, पहला अध्याय शुरू होने से पहले।
- 91 Chapters and Kandas—10 · 18 · 29 · 14 · 20, यजुर्वेद की दोनों शाखाएँ पूरी तरह ली हुई।
- 132 Mantras with सरल अर्थ—संस्कृत और सरल हिंदी आमने-सामने, हर एक एक व्यावहारिक पंक्ति पर समाप्त।
- A Reference Half for Students—25 जीवन सिद्धांत, 25 दैनिक जीवन सूत्र, 20 चिंतन प्रश्न, 10 जीवन सूत्र और अध्ययन, नेतृत्व तथा दैनिक जीवन पर तीन दस-बिंदु खंड।
About the Author
राजुल भार्गव (परिकल्पना) मेरा सनातन और Sanatana Bodh शृंखला के परिकल्पनाकार हैं — हिंदी पुस्तकों की एक सुव्यवस्थित शृंखला जो भारत के ज्ञान, ग्रंथों और संस्कारों को सरल, सुलभ भाषा में नई पीढ़ी तक पहुँचाती है। शृंखला का मूल भाव मेरा सनातन के पहले ही पृष्ठ पर कहा गया है: ‘अपनी जड़ों को जानो, अपनी विरासत पर गर्व करो।’ इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि युवा पाठकों को उनकी जड़ों, संस्कृति और पहचान से जोड़ना, और उनमें गर्व, ज़िम्मेदारी और सकारात्मक सोच जगाना है — मूल ग्रंथों के आदर्शों, संस्कारों और जीवन-संदेशों को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना जिसे अगली पीढ़ी अपना सके, साथ ही गंभीर पाठकों को गहन अध्ययन के लिए मूल ग्रंथों की ओर लौटाना। मेरा सनातन के साथ Sanatana Bodh शृंखला में वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, रामचरितमानस, महाभारत, सूर्यसिद्धांत और अष्टांग हृदय पर समर्पित संस्करण भी शामिल हैं।
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